भारतवंशी
दुनियाभर में रहने वाले भारतीयों का रचनात्मक मंच
 

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भारतीय संस्कृति अनेकता में एकता के सूत्र-वाक्य में यकीन रखती है। यहाँ रहन-सहन, खान-पान, बोल-चाल एवं जीवनशैली की बहुआयामी विविधता दिखाई देती है। यही विविधता भारत को पूरी दुनिया में अनुपम बनाती है।

दुनियाभर में रहने वाले भारतवंशी अपनी मातृभूमि से अटूट रागात्मक सम्बन्ध महसूसते हैं और विविध अवसरों पर उजगार करते हैं। दुनियाभर के 202 देशों में भारतीय मूल के करीब तीन करोड़ लोग निवास कर रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक यूएसए में 32 लाख, यूके में 16 लाख, दक्षिण अफ्रीका में 13 लाख कनाडा में 12 लाख आस्ट्रेलिया में 4 लाख और सूरीनाम, फिजी, मॉरीशस, न्यूजीलैंड, वेस्ट इंडीज़ आदि देशों में रह रहे लाखों भारतीय भावनात्मक तौर पर भारत और भारतीयता से प्रेम करते हैं। उनमें अब भी सनातन संस्कृति एवं परिवार मूल्यों में आस्था है।

"गर्भनाल पत्रिका" को दुनियाभर के भारतवंशियों ने अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति के मंच के तौर पर स्वीकार किया है। सनातन भारतीय अस्मिता और पहचान से जुड़ी परम्पराओं, भारतीय भाषाओं के उन्नयन एवं भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण-संवर्धन के लिये भी "गर्भनाल पत्रिका" मिशन के तौर पर कार्य कर रही है। "गर्भनाल" विगत 8 बरसों से दुनियाभर में बसे लगभग 2 लाख प्रवासी भारतीयों को उनके ईमेल पतों पर पीडीएफ के रूप में निःशुल्क भिजवाई जा रही है। भारतीयता को बरकरार रखने के इस मिशन से जुड़े एवं रचनात्मक, आर्थिक सहयोग करें।

पिछले दस बरसों की गर्भनाल की यात्रा के दौरान प्रवासी भारतीयों और भारतवंशियों (वे जो स्थायी तौर पर विदेशों में बस गये हैं) से हुए सम्पर्क का इतना-सा निचोड़ निकाल पाया हूँ कि कुछ कहने, उजागर करने और विचार साझा करने की तड़प कमोबेश कम या ज्यादा सभी भारतवंशियों में अब भी बनी हुई है।

हालांकि वाट्सएप के तमाम मंचों पर सम्वाद और विमर्श की जिस तरह दुर्गति होते हुए दिख रही है, वाबजूद इसके "भारतवंशियों" का यह ग्रुप बनाने की प्रेरणा के पीछे इतनी-सी सद्इच्छा है कि भारतवंशियों की गौरव प्रदान करने वाली व्यक्तिगत उपलब्धियों, कीमती सूचनाओं और समाजोपयोगी सन्दर्भों को आपस में साझा किया जाये। चूँकि साहित्य भी जीवन का एक आवश्यक अंग है अतः व्यक्तिगत सृजन को भी अत्यंत अल्प मात्रा में यहाँ स्वीकारा जायेगा।

भारतीय भाषाओं, खासकर दक्षिण भारतीय भाषाओं से हिंदी भाषी परिचित हों, विदेशों के दक्षिण भारतीय संगठन किस तरह रचनात्मक काम कर रहे हैं, उनकी उपलब्धियों, गतिविधियों की उल्लेखनीय सूचनाएँ इस मंच पर साझा की जायेंगी। हिंदी और उसकी समस्त सहोदरी बोलियों की अस्मिता को बचाने की भी बात भी यहां की जायेगी।

अगर आप भारत प्रेमी हैं तो इस मिशन से जुड़ना चाहते हें तो स्वागत है।  हमारा पता है -

garbhanal@ymail.com, bharatwanshi.nri@gmail.com 

 

 

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